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इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब राजाधिराज बाबा महाकाल निकले नगर भ्रमण पर औऱ हुआ कुछ ऐसा

नमस्कार

आज के अपने इस ब्लॉग में मैं आपसे बात करूँगी उस दुर्लभ सयोंग के विषय में जो कल घटित हुआ। 


कल से सावन महीना(Sawan Mahina) शरू हुआ है,औऱ सबसे अच्छी बात ये हुई कि कल सोमवार था, शिवजी का प्रिय दिन। सावन के सोमवार का यूं तो बहुत अधिक महत्व होता है, किन्तु बात जब महाकाल(Mahakal) की नगरी उज्जैन(Ujjain) के संदर्भ में की जाए तो यहाँ सावन सोमवार बहुत विशेष हो जाता है । इसका कारण यह है कि उज्जैन में सावन के प्रत्येक सोमवार को राजाधिराज बाबा महाकाल नगर भ्रमण के लिए निकलते है,अपनी नगरी व अपने भक्तों का हाल जानने के लिए।भक्त भी भक्ति में भाव-विभोर होकर अपने महाराज का स्वागत करते है।पूरी उज्जैन नगरी शिवमय हो जाती है।हर तरफ आनंद की अनुभूति होती है।इस बार भी राजाधिराज नगर भ्रमण पर निकले औऱ इस बार भी भक्तों के ऊपर उनकी कृपा बरसी। पर भक्तगण हर बार की तरह उनके दर्शन नहीं कर पाएं। इस बार कोरोना महामारी के कारण प्रशासन ने सवारी(Sawari) मार्ग बदलने का निर्णय लिया । प्रशासन के इस निर्णय को कई भक्तों ने उचित निर्णय नहीं माना। क्योंकि मार्ग के बदले जाने से  पूर्व में नियोजित मार्ग पर जिन भक्तों के मकान है वे भक्त महाकाल महाराज के दर्शन नहीं कर पाएं। किन्तु मार्ग बदले जाने पर जो दुर्लभ सयोंग बना उसे जानकर आप भी भाव विभोर हो जाएंगे। औऱ प्रशासन के निर्णय की सराहना करेंगे। इस बार हुआ यूं कि महाकाल की सवारी(Mahakal Ki Sawari) अपने पारम्परिक मार्ग से न निकलते हुए मंदिर के पीछे वाले मार्ग से निकली, ऐसा सवारी के इतिहास में पहली बार हुआ है। कोरोना ने बहुत हद तक जन जीवन को प्रभावित किया है । किंतु कोरोना के चलते सवारी का मार्ग बदला जाना भी इतिहास बन गया। इसी मार्ग पर माता हरसिद्धि का मंदिर है। औऱ जब राजाधिराज महाकाल इस मार्ग से निकले तो पहली बार हर औऱ हरसिद्धि का मिलन हुआ। इस दृश्य को देखकर सभी उपस्थित जन भाव विह्लल हो उठे।माता हरसिद्धि का मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहाँ माता सती की कोहनी गिरी थी।पहली बार शिव जी अपनी अर्धागिनी सती से मिलने आए ।जैसे ही महाकाल, माता हरसिद्धि के मंदिर पहुंचे वहाँ उनका भव्य स्वागत गाजे बाजे व आतिशबाजी के साथ किया गया।हरसिद्धि मंदिर की औऱ से महाकाल को वस्त्र औऱ पगड़ी भेंट की गई । पूजन व आरती करके हर का हरसिद्धि से मिलन कराया गया। वहाँ उपस्थित रहे भक्तगण के लिए तो वास्तव में यह दृश्य अद्भुत व अलौकिक रहा होगा। उज्जैन में हर साल हरि औऱ हर का मिलन तो होता ही है। पहली बार हर औऱ हरसिद्धि का मिलन भी हो गया।अब हर सोमवार को भक्तगण अपने राजाधिराज का दर्शन घर बैठे ही कर पाएंगे । मैंने अपने ब्लॉग के माध्यम से अपने प्रिय पाठकों व बाबा महाकाल के प्रिय भक्तों के लिए अपने इस ब्लॉग पर एक छोटा सा प्रयास किया है ,ताकि आप सभी वीडियो के माध्यम से बाबा महाकाल के दर्शन का लाभ प्राप्त कर सकें । आशा करती हूँ आप सभी को वही आनंद प्राप्त होगा जो आप महाकाल की सवारी को देखते समय महसूस करते थे ।

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4 टिप्पणियाँ

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