आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में देश भर में मनाया जाता है। पूर्णिमा की तिथि को इस बार चंद्रग्रहण भी लग रहा है। यह लगातार तीसरी साल है जब गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण लग रहा है। माना जा रहा है कि 5 जुलाई दिन रविवार को लगने वाला यह चंद्रग्रहण उपछाया चंद्रग्रहण है, जिसमें मात्र चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ती है। इसलिए इसको ग्रहण नहीं माना जा रहा है और इस वजह से इसका प्रभाव और सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। जानिए इससे जुड़ी अन्य खास बातें…
इस बार यह चंद्रग्रहण धनु राशि में लग रहा है। इस वजह से धनु राशि वालों पर इसका गहरा प्रभाव देखने को मिलेगा। पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य मिथुन राशि में होंगे और पूर्णिमा तिथि होगी। चूंकि यह एक उपछाया चंद्रग्रहण है, जिसकी वजह से सूतक काल मान्य नहीं होंगे। ज्योतिष शास्त्र में सूतक काल को एक शुभ समय अवधि नहीं माना गया है। सूतक काल में किसी भी प्रकार के धार्मिक और शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। मगर इस बार चंद्रग्रहण में ऐसी कोई पाबंदी नहीं होगी।
गुरु पूर्णिमा की तिथि इस बार 4 जुलाई दिन शनिवार से ही दोपहर 11 बजकर 33 मिनट पर आरंभ हो जाएगी। जो 5 जुलाई को 10 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। इससे पहले साल 2018 में 27 जुलाई को और साल 2019 में 16 जुलाई को गुरु पूर्णिमा और चंद्रग्रहण एक साथ था।
चंद्रग्रहण एक प्रकार खगोलीय घटना है जो कि तब होती है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा तीनों एक सीध में आ जाते हैं। मगर इस बार का चंद्रग्रहण उपछाया चंद्रग्रहण है।उपछाया चंद्रग्रहण में सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में न होकर इस प्रकार से होते हैं कि पृथ्वी की हल्की सी छाया ही चंद्रमा पर पड़े तो इसे उपछाया चंद्रग्रहण कहते हैं। इसी साल 5 जून को भी उपछाया चंद्रग्रहण लगा था।
इस बार का चंद्रग्रहण मान्य न होने के कारण आप बेफिक्र होकर गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पूजापाठ कर सकते हैं। इस दिन महाभारत के रचयिता महर्षि वेद व्यासजी की जयंती मनाई जाती है। पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की कथा और दान पुण्य करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन श्रद्धालु गंगास्नान करने के लिए भी विभिन्न तीर्थ स्थलों की ओर प्रस्थान करते हैं।
ज्योतिषशास्त्रियों के अनुसार एक महीने के वक्त में 2 या उससे अधिक ग्रहण का होना शुभ नहीं माना जाता है। वहीं 5 जून से 5 जुलाई के बीच में यह तीसरा ग्रहण है। माना जा रहा है कि इसके प्रभाव से ग्रहों की स्थिति में भारी उलटफेर देखने को मिल सकता है। माना जा रहा है कि इसके प्रभाव से लोगों को भीषण प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ सकता है। बड़े देशों के बीच दुश्मनी की खाई और भी गहरी हो सकती है। महंगाई की मार लोगों को लंबे समय तक झेलनी पड़ सकती है।
6 टिप्पणियाँ
very good information
जवाब देंहटाएंधन्यवाद,आपको लेख पसंद आया।यही मेरी मेहनत का फल है।
हटाएंSuperb 👌👌
जवाब देंहटाएंधन्यवाद,आपको लेख पसंद आया।यही मेरी मेहनत का फल है।
हटाएंबढ़िया जानकारी दी है
जवाब देंहटाएंधन्यवाद , आपको लेख पसंद आया यही मेरी मेहनत का फल हैं
हटाएंThanks for reading😊🙏🏻
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