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आज का दुःख कल का सौभाग्य बनता हैं

आज का दुःख कल का सौभाग्य बनता है.....

नमस्कार
आज के अपने इस ब्लॉग में मैं आपसे हमारे जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव पर बात करूँगी । दोस्तों हमारे जीवन में घटित हर घटना के परिणाम सुखद होते हैं। कैसे जानते हैं इन प्रसंगों से.......

महाराज दशरथ को जब संतान प्राप्ति नहीं हो रही थी तब वो बड़े दुःखी रहते थे..पर ऐसे समय में उनको एक ही बात से होंसला मिलता था जो कभी उन्हें आशाहीन नहीं होने देता था

मजे की बात यह कि इस होंसले की वजह किसी ऋषि-मुनि या देवता का वरदान नहीं बल्कि श्रवण के पिता का शाप था....

दशरथ जब-जब दुःखी होते थे तो उन्हें श्रवण के पिता का दिया शाप याद आ जाता था... (कालिदास ने रघुवंशम में इसका वर्णन किया है)
श्रवण के पिता ने ये शाप दिया था कि  ''जैसे मैं पुत्र वियोग में तड़प-तड़प के मर रहा हूँ वैसे ही तू भी तड़प-तड़प कर मरेगा.....''

दशरथ को पता था कि यह शाप अवश्य फलीभूत होगा और इसका मतलब है कि मुझे इस जन्म में तो जरूर पुत्र प्राप्त होगा.... (तभी तो उसके शोक से मैं तड़प के मरूँगा)

यानि मुनि का शाप दशरथ के लिए संतान प्राप्ति का सौभाग्य लेकर आया....

ऐसी ही एक घटना सुग्रीव के साथ भी हुई....

सुग्रीव जब माता सीता की खोज में वानर वीरों को पृथ्वी की अलग-अलग दिशाओं में भेज रहे थे..... तो उसके साथ-साथ उन्हें ये भी बता रहे थे कि किस दिशा में तुम्हें क्या मिलेगा और किस दिशा में तुम्हें जाना चाहिए या नहीं जाना चाहिये....

श्रीराम सुग्रीव का ये भौगौलिक ज्ञान देखकर हतप्रभ थे...
उन्होंने सुग्रीव से पूछा कि सुग्रीव तुमको ये सब कैसे पता...?

तो सुग्रीव ने उनसे कहा कि...
''मैं बाली के भय से जब मारा - मारा फिर रहा था तब पूरी पृथ्वी पर कहीं शरण न मिली... और इस चक्कर में मैंने पूरी पृथ्वी छान मारी और इसी दौरान मुझे सारे भूगोल का ज्ञान हो गया....''

सोचिये अगर सुग्रीव पर ये संकट न आया होता तो उन्हें भूगोल का ज्ञान नहीं होता और माता जानकी को खोजना कितना कठिन हो जाता...

इसीलिए किसी ने बड़ा सुंदर कहा है : "अनुकूलता भोजन है, प्रतिकूलता विटामिन है और चुनौतियाँ वरदान है और जो उनके अनुसार व्यवहार करे....वही पुरुषार्थी है....

ईश्वर की तरफ से मिलने वाला हर एक पुष्प अगर वरदान है.......तो हर एक काँटा भी वरदान ही समझो....

मतलब.....अगर आज मिले सुख से आप खुश हो...तो कभी अगर कोई दुख,विपदा,अड़चन आजाये.....तो घबराना नहीं....क्या पता वो अगले किसी सुख की तैयारी हो....

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4 टिप्पणियाँ

  1. जे सकाम नर सुनहिं जे गावहिं।
    सुख सम्पत्ति नानाविधि पावहिं

    रामायण की उपरोक्त चौपाई को जो भी मनुष्य सकामभाव से सुनते और जो गाते हैं, वे अनेकों प्रकार के सुख और संपत्ति पाते हैं। रामचरित मानस एक दिव्य महाकाव्य है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसकी सभी चौपाइयां मनोवांछित फल प्रदान करने वाली है। ऐसे में जो भी व्यक्ति पूरी श्रद्धा भाव से इसका पाठ करता है या सुनता सुनता है उसको सुख-संपत्ति का लाभ मिलता है और जगत में देव दुर्लभ सुखों को भोगकर अंतकाल में श्री रघुनाथजी के परमधाम को जाता है।

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  2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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