आपने कई बार पूजा—पाठ से जुड़ी अलग—अलग बातें सुनी होंगी। अलग—अलग धर्म ग्रंथों में पढ़ा और जाना होगा। लेकिन जब आप इन धर्म ग्रंथों के गुढ़ अर्थ को समझेंगे तो शायद इसे अपने जीवन में भी महसूस कर सकेंगे। मेरा ये ब्लॉग आज आपको ऐसी ही कुछ बातों की तरफ ले जा रहा हैं। जिसे हम जानते तो हैं पर कई बार उसे किसी भी वजह से मानते नहीं है। उम्मीद हैं पूजा—पाठ के अर्थ और महत्व पर जुटाई गई ये जानकारी आपको पसंद आए।
पूजा-पाठ हिंदू धर्म का एक विशेष अंग है। पूजा-पाठ करने से सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। विधि-विधान से पूजन करने पर देवी-देवता शीघ्र प्रसन्न होते हैं। मगर बहुत ही कम लोग हैं जो पूजा से संबंधित जरूरी व सही बातें जानते हैं। इन बातों के बारे में हमारे धर्म ग्रंथों में भी बताया गया है। पूजा से संबंधित ऐसी कई छोटी-छोटी जरूरी बातें होती हैं जिनका ध्यान रखना चाहिए। जैसे कि—
1— घी और तेल दोनों के दीपक प्रज्वलित करने चाहिए। तेल का दीपक बाएं हाथ और घी का दीपक दाएं हाथ की ओर प्रज्वलित करना।
2— पूजा के लिए अखंडित चावलों का प्रयोग न कर, हल्दी में डूबोए हुए पीले चावल चढ़ाना।
3— पूजा के समय पान का पत्ता, इलाइची, लौंग, गुलकंद आदि अर्पित करना।
4— पुराना जल, फूल और पत्ते न चढ़ाए। लेकिन गंगाजल, तुलसी के पत्ते, बिल्वपत्र और कमल ये चारों ऐसी शुद्ध और सात्विक चीज़ें है जो हर समय ताजा होती है। शास्त्रों में हर पूजा में इनका उपयोग इसीलिए किया जाता रहा है।
5— पूजन से पूर्व देवी-देवताओं का आह्वान करना। ध्यान करके उन्हें आसन्न देना, स्नान करवाना, धूप-दीप जलाकर कुमकुम, फूल, प्रसाद अर्पित करना।
6— जैसे हर मौसम बदलकर खान पान और पहनाव बदलता है। ठीक वैसे ही शास्त्रों में भी भगवान को अलग-अलग रंग का वस्त्र चढ़ाने का उल्लेख है। भगवान विष्णु को पीले रंग का रेशमी वस्त्र, मां दुर्गा, सूर्य देव और श्री गणेश को लाल रंग के भोलेनाथ को सफेद रंग के वस्त्र चढ़ाने के पीछे भी धार्मिक महत्व है।
7— पूजा के समय सभी देवी देवताओं के साथ ही साथ वास्तु देवता और ग्राम देवता का भी ध्यान हो। ऐसा कहा गया है कि ऐसा करने से घर में खुशहाली आती है।
8— पूजा करते समय जिस आसन्न पर बैठते हैं उसे पैर से इधर-उधर नहीं खिंसकाएं।
9— पूजा करते समय इष्टदेव के साथ ही स्वस्तिक, कलश, नव ग्रह देवता, पंच लोकपाल षोडश मातृका, सप्त मातृका का पूजन करने का महत्व है।
10— घर में प्रतिदिन घी का एक दीपक अवश्य प्रज्वलित करें। इससे कई वास्तु दोष दूर होते हैं। दीपक के धुंए से नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होने का धार्मिक तर्क है।
11— श्रीगणेश, सूर्यदेव, मां दुर्गा, विष्णु जी, भगवान शिव को पंचदेव कहा जाता है। कोई भी शुभ कार्य करने से पूर्व इनका पूजन करना हमेशा से ही प्रथम माना गया है।
12— वायु पुराण में कहा गया है कि स्नान के पश्चात ही पूजा के लिए फूल-पत्ते तोड़े। बिना स्नान करे जो व्यक्ति फूल या तुलसी तोड़ता है भगवान उसे ग्रहण नहीं करते।
13—पूजा करते समय अनामिका उंगली अर्थात रिंग फिंगर से चंदन, कुमकुम, अबीर, गुलाल, हल्दी, मेहंदी लगाना भी शुभ माना गया है।
14—पूजा स्थान पर चप्पल पहनकर न आना, चमड़े की बेल्ट या पर्स अपने पास रखकर भी पूजन नहीं करने के पीछे धार्मिक और सांइटिफिक दोनों ही कारण है।
उम्मीद है ब्लॉग में बताई गई बातों पर आप सहमत होंगे।
10 टिप्पणियाँ
बहुत अच्छी जानकारी।
जवाब देंहटाएंThanks 😊🙏🏻
हटाएंnice
जवाब देंहटाएंThanks 😊🙏🏻
हटाएंNice beautiful
जवाब देंहटाएंBahut hi sargarbhit jankari di he. Really nice effort
जवाब देंहटाएंAisehi nayi nayi jankari dete rahiye💐
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया जानकारी बहुत खूब
जवाब देंहटाएंVery nice true line
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया गुड़िया
जवाब देंहटाएंThanks for reading😊🙏🏻
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