आज के अपने इस ब्लॉग में मैं बात करूँगी 21 जून को लगने वाले सूर्यग्रहण के बारे में....
21 जून को दुनिया 2020 का पहला सूर्य ग्रहण देखने जा रही है। जब पूर्ण सूर्य ग्रहण होता है तो चंद्रमा पूर्ण रूप से सूर्य को ढक लेता है, जबकि आंशिक और कुंडलाकार ग्रहण में सूर्य का केवल एक हिस्सा ही छिपता है। 21 जून को लगने वाला ग्रहण कुंडलाकार ग्रहण होगा जिसमें सूर्य वलयाकार दिखाई देगा। ऐसी स्थिति में जब ग्रहण चरम पर होता है तो सूर्य किसी चमकते हुए कंगन, या अंगूठी की तरह नजर आता है।
कुरुक्षेत्र के इतिहास में पहली बार कोरोना वायरस की वजह से सूर्यग्रहण मेला का आयोजन नहीं किया जाएगा। आदिकाल से चली आ रही यह परंपरा कोरोना वायरस के चलते जनकल्याण के लिए रोक दी गई है। हालांकि अखाडों के प्रतिनिधियों व साधु संतों को औपचारिकता के तौर पर ब्रह्मसरोवर व सन्निहित सरोवर में पवित्र स्नान व पूजा का समय दिया जाएगा। यहां विश्व शांति और कल्याण के लिए ब्रह्मसरोवर पर पूजा-अर्चना का एक छोटा सा कार्यक्रम किया जाएगा।
सूर्य ग्रहण को भारत में आराम से देखा जा सकता है। इस सूर्य ग्रहण का नजारा 25 साल पहले अक्तूबर 1995 में लगे ग्रहण की तरह ही होने वाला है, जब दिन में भी अंधेरा हो गया था। पक्षी रात समझकर अपने अपने घोंसलों में चले गए थे।
सूर्य ग्रहण का सूतक काल 20 जून दिन शनिवार को रात 10:20 से शुरू हो जाएगा। 21 जून को दो बड़ी खगोलीय घटनाएं होने वाली हैं। पहली घटना सूर्यग्रहण है। इसमें सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा इस तरह आ जाएगा कि सूर्य का आधे से ज्यादा हिस्सा छिप जाएगा और कंगन की तरह दिखाई देगा। इसे रिंग ऑफ फायर भी कहा जाता है। दूसरी घटना, 21 को ही सूर्य कर्क रेखा के ठीक ऊपर आ जाएगा। जिससे ये साल का सबसे बड़ा दिन भी होगा। ये सदी का दूसरा ऐसा सूर्यग्रहण है, जो 21 जून को हो रहा है। इससे पहले 2001 में 21 जून को सूर्य ग्रहण हुआ था।
ज्योतिष के नजरिये से 21 जून, यानी रविवार को होने वाले सूर्य ग्रहण पर ग्रहों की ऐसी स्थिति बन रही है, जो 500 सालों में नहीं बनी। काशी के ज्योतिषाचार्य जगदीश प्रसाद व ज्योतिषाचार्य रमेश चंद्र ने बताया कि आषाढ़ महीने में लग रहे इस सूर्य ग्रहण के समय 6 ग्रह वक्री रहेंगे। उन्होंने बताया कि यह ग्रहण राहुग्रस्त है। मिथुन राशि में राहु सूर्य-चंद्रमा को पीड़ित कर रहा है। मंगल जल तत्व की राशि मीन में है और मिथुन राशि के ग्रहों पर दृष्टि डाल रहा है। इस दिन बुध, गुरु, शुक्र और शनि वक्री रहेंगे। राहु और केतु हमेशा वक्री ही रहते है। इन 6 ग्रहों की स्थिति के कारण ये सूर्य ग्रहण और भी खास हो गया है।
ज्योतिषाचार्य जगदीश प्रसाद ने बताया कि देश और दुनिया को लिए इस ग्रहण का अशुभ असर दिखेगा। इस ग्रहण पर मंगल की दृष्टि पडने से देश में आगजनी, विवाद और तनाव की स्थितियां बन सकती हैं। आषाढ़ महीने में ये ग्रहण होने से मप्र, उप्र, बिहार, कश्मीर और दिल्ली के पर इसका विशेष असर देखने को मिलेगा। इनके साथ ही यमुना नदी के किनारे बसे शहरों पर भी इसका अशुभ असर पड़ेगा। वहीं अफगान और चीन के लिए भी ग्रहण अशुभ रहेगा।
रविवार को सूर्य ग्रहण सुबह करीब 10 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा और दोपहर 01 बजकर 49 मिनट पर खत्म होगा। इसका सूतक 12 घंटे पहले यानी 20 जून को रात 10 बजकर 20 मिनट पर शुरू हो जाएगा। जो कि ग्रहण के साथ ही खत्म होगा। यह ग्रहण भारत, चीन, नेपाल, पाकिस्तान, सऊदी अरब, यूएई, इथियोपिया मध्य अफ्रीकी गणराज्य और कांगो सहित अफ्रीका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा।

7 टिप्पणियाँ
very good.
जवाब देंहटाएंThanks 😊
हटाएंजबरदस्त
जवाब देंहटाएंThanks 😊
हटाएंGood
जवाब देंहटाएंThanks ma'am 😊
हटाएंGood going
जवाब देंहटाएंThanks for reading😊🙏🏻
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